
चौरी चौरा थाना क्षेत्र में पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद के बाद मारपीट और फायरिंग के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त चारपहिया वाहन, अवैध तमंचा, जिंदा कारतूस, तीन मोबाइल फोन और 10,870 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, 2 सितंबर 2026 की रात पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इसी दौरान आरोपियों ने वादी के साथ मारपीट की और उसके मित्र के पैर में गोली मार दी। घायल का अस्पताल में इलाज चल रहा है और पुलिस के मुताबिक उसकी स्थिति सामान्य है।
मामले में थाना चौरी चौरा पर मु0अ0सं0 345/2026 के तहत धारा 191(2), 115(2), 109(1), 324(4) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों—
– विशु चौधरी पुत्र रतन लाल चौधरी, निवासी खैराबाद डुडी, थाना चौरी चौरा
– विजय पासवान पुत्र राजेश पासवान, निवासी चकदेइया, थाना चौरी चौरा
– मोनू मौर्य पुत्र राजेश मौर्य, निवासी चौरी खास, थाना चौरी चौरा
को गिरफ्तार किया।
हथियार और नकदी बरामद
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक चारपहिया वाहन, एक अवैध पिस्टल/तमंचा, एक जिंदा कारतूस, तीन मोबाइल फोन और 10,870 रुपये नकद बरामद किए। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में धारा 3(5) बीएनएस और 3/25 आर्म्स एक्ट की बढ़ोतरी की गई है।
आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी विजय पासवान के खिलाफ गोरखपुर के विभिन्न थानों में चोरी समेत कई मुकदमे दर्ज हैं। उसके खिलाफ थाना बेलीपार, चौरी चौरा, गगहा और खोराबार में दर्ज कई मामलों का आपराधिक इतिहास पुलिस ने बताया है। इसके अलावा उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
वहीं गिरफ्तार मोनू मौर्य के खिलाफ थाना खोराबार में पॉक्सो एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा और थाना गीडा में भी मामला दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
पुलिस का कहना है कि मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम
कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक वेद प्रकाश शर्मा, वरिष्ठ उपनिरीक्षक संतोष कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अशोक शर्मा, उपनिरीक्षक रजनीश मिश्रा, उपनिरीक्षक सौरभ झाँ समेत थाना चौरी चौरा की पुलिस टीम शामिल रही।
पुलिस की कार्रवाई के बाद अब मामले की विवेचना जारी है और फायरिंग में प्रयुक्त हथियार समेत अन्य बरामदगी को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।











