
मऊ। सेना में करीब 25 वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए योगेंद्र मोहन के पहली बार गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। इस दौरान ग्रामीणों ने भारत माता की जय के नारे लगाए और देश की सेवा के लिए उनके योगदान को याद किया।
सबरहद विरैचा निवासी रामसेवक मौर्य के पुत्र योगेंद्र मोहन सेना में करीब 25 वर्ष तक विभिन्न स्थानों पर तैनात रहे। सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार घर पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल रहा। पिता रामसेवक मौर्य ने बेटे को भारत माता की सेवा पूरी कर सकुशल घर लौटने पर बधाई दी। योगेंद्र मोहन ने पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
योगेंद्र मोहन ने कहा कि सेना में अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होता है। जवान को हर परिस्थिति में देश और कर्तव्य को सर्वोपरि रखना पड़ता है। उन्होंने सेना में बिताए 25 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि सेवा के अंतिम दो वर्ष जम्मू-कश्मीर में बीते, जहां हर समय चुनौती और खतरा बना रहता था।
उन्होंने कहा कि देश की सेवा करने का अवसर उनके लिए गौरव की बात है। इस दौरान उन्होंने अपनी जन्मदात्री मां को भी याद किया, जिनका कई वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि आज अगर मां होतीं तो उनकी सेवानिवृत्ति और घर वापसी की खुशी सबसे अधिक उन्हें होती।
इस मौके पर ग्रामीणों ने कहा कि सेना से सेवानिवृत्त होकर लौटे जवान का सम्मान पूरे गांव के लिए गौरव का विषय है। ग्रामीणों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ और सुखमय जीवन की कामना की।











