
📍चिरैयाकोट (मऊ)। चिरैयाकोट नगर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों भीषण गर्मी और उमस ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। सुबह नौ बजे के बाद ही तेज धूप के कारण सड़कों पर सन्नाटा छाने लगता है। लोग केवल अत्यंत जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
प्रचंड गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण दिनभर लोग राहत की तलाश में घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। बाजारों और गलियों में भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम चहल-पहल देखने को मिल रही है।
भीषण गर्मी ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। खेतों में तैयार धान की बेहन तेज तपिश के कारण सूखने की कगार पर पहुंच गई है। मानसून की देरी और बारिश नहीं होने से खेती-किसानी पर संकट गहराने लगा है। आसमान साफ रहने और बादलों का कोई संकेत नहीं मिलने से किसान जल्द बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी के पीछे पर्यावरण असंतुलन एक बड़ा कारण है। वृक्षों की लगातार कटाई, हरियाली में कमी और एयर कंडीशनर (एसी) के बढ़ते उपयोग से ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञ भी समय-समय पर अधिक से अधिक पौधारोपण, जल संरक्षण और ऊर्जा के संतुलित उपयोग पर जोर देते रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में भीषण गर्मी और मौसम में असंतुलन जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।📰
भीषण गर्मी और उमस से जनजीवन बेहाल, बारिश की राह देख रहे किसान; पर्यावरण असंतुलन बना चिंता का विषय
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मऊ में गर्मी का कहर जारी! सुबह 9 बजे के बाद सड़कों पर सन्नाटा, लोग घरों में कैद। बारिश की देरी से किसानों की बढ़ी चिंता, पर्यावरण संरक्षण की उठी मांग। ☀️🌱











