मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमंत कुमार गुप्ता ने बताया कि Down Syndrome (डाउन सिंड्रोम) कोई छूने से फैलने वाली बीमारी नहीं, बल्कि जन्म से जुड़ी एक आनुवंशिक स्थिति है।
यह समस्या तब होती है जब बच्चे के शरीर में 21वें क्रोमोसोम की एक अतिरिक्त कॉपी होती है, जिसे “ट्राइसॉमी 21 (Trisomy 21)” कहा जाता है। ऐसे बच्चों का विकास सामान्य बच्चों की तुलना में थोड़ा धीमा हो सकता है और उन्हें सीखने व बोलने में समय लग सकता है।
इस स्थिति वाले बच्चों की शारीरिक बनावट में कुछ खास बदलाव देखे जा सकते हैं, जैसे चेहरा थोड़ा गोल और चपटा होना, आंखें हल्की तिरछी दिखाई देना, नाक का छोटा होना, हाथ-पैर छोटे होना और मांसपेशियों में कमजोरी।
कुछ मामलों में दिल या थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं, इसलिए नियमित जांच जरूरी है। यह स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन सही देखभाल, पोषण और स्पीच व फिजियोथेरेपी से बच्चों में काफी सुधार लाया जा सकता है। अभिभावकों से अपील है कि ऐसे बच्चों को बोझ न समझें, बल्कि प्यार और सहयोग दें।
गौरतलब है कि इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए सिनेमा ने भी अहम भूमिका निभाई है। 2019 में बनी अहान और 2025 में आई सितारे जमीन पर जैसी फिल्में समाज को यह समझाने का प्रयास करती हैं कि डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चे किसी से कम नहीं होते। सही माहौल, शिक्षा और प्रोत्साहन मिलने पर वे भी अपने जीवन में सफलता हासिल कर सकते हैं और समाज में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।










