
मऊ। मोहम्मदाबाद गोहना नैतिक शिक्षा से युवाओं में मानसिक बदलाव लाकर उन्हें गुणवान और चरित्रवान बनाया जा सकता है। आज के बच्चे कल के भावी समाज हैं। यदि हम बेहतर समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो युवाओं को नैतिक सद्गुणों की शिक्षा देना आवश्यक है। ये बातें माउंट आबू, राजस्थान से आए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने शुक्रवार को नेशनल इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में कहीं। वह छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को जीवन में नैतिक शिक्षा के महत्व के बारे में संबोधित कर रहे थे।
ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहा कि गुणवान और चरित्रवान बच्चे देश की सच्ची संपत्ति हैं। ऐसे बच्चे देश और समाज के लिए रचनात्मक कार्य कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा से व्यक्ति के व्यवहार में निखार आता है। वर्तमान समय में कुसंगति, व्यसन और फैशन के प्रभाव से युवा पीढ़ी भटक रही है। आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को सही दिशा दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि सिनेमा, मोबाइल, इंटरनेट और टेलीविजन के माध्यम से युवा पीढ़ी पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव पड़ रहा है। युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाने की आवश्यकता है। हमारे नैतिक मूल्य और मानवीय मूल्य हमारी विरासत हैं। इन्हीं मूल्यों के कारण भारत की विश्व में विशिष्ट पहचान है। इन मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने चाहिए। सकारात्मक चिंतन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इससे जीवन की समस्याओं का समाधान खोजने और समाज में अच्छे संस्कारों को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।
वरिष्ठ शिक्षक इंद्रसेन सिंह ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को चरित्रवान और गुणवान बनाना है। स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र की राजयोग शिक्षिका बीके एकता बहन ने कहा कि नैतिकता के बिना जीवन अंधकारमय हो जाता है। कॉलेज के प्रिंसिपल मोहम्मद फारूक ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए ब्रह्माकुमारी संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में बीके भगवान भाई ने मन की एकाग्रता बढ़ाने के लिए राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया। इस अवसर पर मधुबाला, ओरोज आलम, मोहम्मद असल, सिराज अहमद, बीके अनिल भाई, बीके सुरेश गुप्ता, बीके पूर्णिमा बहन सहित कॉलेज के शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे।











