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कम पानी, कम बीज… ज्यादा पैदावार का गुर सीख रहे कृषि छात्र; सर्वोदय पीजी कॉलेज के खेत में श्री विधि से की धान की रोपाई

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हारून खान

 

मऊ: घोसी खेती अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है। कृषि विद्यार्थियों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती का व्यावहारिक अनुभव देने के उद्देश्य से सर्वोदय पीजी कॉलेज घोसी के कृषि विभाग ने कॉलेज के कृषि फार्म पर श्री विधि (एसआरआई पद्धति) से धान की रोपाई कराई। इस दौरान विद्यार्थियों ने खेत में उतरकर खुद रोपाई की और आधुनिक कृषि तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखा।

 

प्रशिक्षण के दौरान कृषि विभाग के अजय मिश्रा, ज्ञानप्रकाश पाण्डेय और चंदन मिश्रा ने बताया कि श्री विधि से धान की खेती करने पर कम बीज और कम पानी की जरूरत पड़ती है जबकि उत्पादन पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने, समय पर निराई-गुड़ाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और जल संरक्षण जैसी तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और घटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच वैज्ञानिक खेती ही भविष्य का सबसे प्रभावी विकल्प है।

 

धान की रोपाई के साथ विद्यार्थियों ने मूंगफली, मूंग और मक्का की भी बुवाई की। उन्हें उन्नत बीजों के चयन, बीज उपचार, वैज्ञानिक बुवाई, सिंचाई प्रबंधन और फसल सुरक्षा के व्यावहारिक तरीके भी बताए गए। खेत में स्वयं कार्य करते हुए विद्यार्थियों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को करीब से समझा।

 

कार्यक्रम में कृषि विभाग के नीतिल कुमार श्रीवास्तव और अमरनाथ जायसवाल ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा तभी सार्थक होगी जब विद्यार्थी खेत में उतरकर तकनीकों को सीखेंगे और भविष्य में किसानों तक वैज्ञानिक खेती का संदेश पहुंचाएंगे।

 

इस मौके पर शिवकुमार, प्रभात, सत्यम, यश, प्रिया, खुशी, सृष्टि, अर्चना, संजना, महक समेत करीब 60 कृषि विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कॉलेज प्रशासन ने बताया कि विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख और व्यवहारिक कृषि शिक्षा देने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।

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