
समुद्री दुनिया में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सीफेयरर यानी समुद्री नाविक सप्लायर बन गया है। BIMCO-ICS Seafarer Workforce Report 2026 के अनुसार भारत की हिस्सेदारी वैश्विक समुद्री कार्यबल में बढ़कर 12.2 प्रतिशत हो गई है। फिलीपींस पहले स्थान पर है, जबकि भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है।
वर्तमान में 3 लाख 11 हजार से अधिक भारतीय नाविक दुनिया भर के व्यापारी जहाजों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। भारतीय नाविक अपनी तकनीकी दक्षता, अनुशासन और अंग्रेज़ी भाषा कौशल के कारण वैश्विक स्तर पर बेहद पसंद किए जाते हैं।
इसी के साथ भारत सरकार ने देश को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने के लिए 69,725 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक पैकेज को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत में जहाज निर्माण को बढ़ावा देना, आधुनिक शिपयार्ड विकसित करना, निवेश आकर्षित करना और समुद्री क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है।
इस योजना के तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में नए शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य भारत की जहाज निर्माण क्षमता को 4.5 मिलियन ग्रॉस टनेज तक बढ़ाना है।
भारत का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार मात्रा के आधार पर और 70 प्रतिशत व्यापार मूल्य के आधार पर समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में यह पहल विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता कम करेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
समुद्री क्षेत्र में भारत की यह उपलब्धि केवल रोजगार और व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को वैश्विक Maritime Power बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


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